सरकार ने हाल ही में GST दरों में कटौती कर आम लोगों को राहत देने का ऐलान किया था। उम्मीद थी कि इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा और रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी। लेकिन मामला उल्टा हो गया—कुछ बड़े E-Commerce प्लेटफॉर्म्स पर वही चीजें महंगी दिखने लगीं, जिनका टैक्स घटाया गया था। इससे लोगों में नाराज़गी फैली और सरकार ने इस पर सख्ती दिखाते हुए जांच शुरू कर दी। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, उपभोक्ताओं ने क्या शिकायत की, और सरकार तथा RBI ने हाल ही में कौन-से नए कदम उठाए हैं।
GST काउंसिल के बड़े फैसले
3 सितंबर 2025 को हुई GST काउंसिल की 56वीं बैठक में बड़ा बदलाव किया गया। 12% और 28% GST स्लैब खत्म कर केवल 5% और 18% स्लैब लागू किए गए। इस फैसले के बाद ज्यादातर वस्तुओं के दाम घटने की उम्मीद थी। दरअसल, सरकार का मकसद था कि टैक्स का बोझ कम होकर लोगों को राहत मिले।
E-Commerce प्लेटफॉर्म्स पर उल्टा असर
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक Flipkart, Amazon, Blinkit और Zepto जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतें आईं कि जिन प्रोडक्ट्स पर टैक्स घटा है, उनकी कीमतें घटने की बजाय बढ़ गईं। कई उपभोक्ताओं ने इस बारे में सरकार को शिकायत दर्ज कराई। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर GST से जुड़ी लगभग 3000 शिकायतें पहुंची हैं।
सरकार की कार्रवाई
सरकार ने पहले से अंदाजा लगाया था कि कंपनियां टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों तक पूरी तरह नहीं पहुंचाएंगी। इसी वजह से वित्त मंत्रालय ने 9 सितंबर को सभी सेंट्रल जीएसटी ज़ोन को निर्देश दिया था कि 54 ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों का डाटा 22 सितंबर से पहले और बाद में इकट्ठा किया जाए। इसमें खाने-पीने का सामान, पढ़ाई से जुड़ी चीजें और दवाइयां शामिल थीं। कंपनियों से जवाब मांगा गया और तकनीकी गड़बड़ी का हवाला भी मिला, लेकिन सरकार का साफ कहना है कि टैक्स कम होने के बाद कीमतें बढ़नी नहीं चाहिएं।
मुनाफाखोरी और कानून
GST लागू होने के समय एंटी-प्रॉफिटिंग प्रावधान भी बनाए गए थे ताकि सप्लायर टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों को दें। इसके लिए नेशनल एंटी प्रॉफिटिंग अथॉरिटी (NAA) बनाई गई थी। बाद में इसकी जिम्मेदारी कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) को दी गई। लेकिन अप्रैल 2025 से एंटी-प्रॉफिटिंग का प्रावधान ही खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल कोई कड़ा कानूनी ढांचा कंपनियों को कीमतें घटाने के लिए बाध्य नहीं करता।
RBI की नई नीतियां
इसी बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। इसके साथ ही रुपए को अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में मजबूत करने के लिए नए कदम उठाए गए। अब ऑथराइज्ड डीलर बैंक भूटान, नेपाल और श्रीलंका के नागरिकों को भारतीय रुपए में कर्ज दे सकेंगे। साथ ही वॉस्ट्रो अकाउंट्स के जरिए रुपए में जमा धनराशि को कॉर्पोरेट बॉन्ड और कमर्शियल पेपर्स में निवेश करने की अनुमति दी गई है। इन कदमों से पड़ोसी देशों के साथ व्यापार आसान होगा और Dollar पर निर्भरता घटेगी।
निष्कर्ष
सरकार ने आम जनता की जेब पर बोझ कम करने के लिए GST दरें घटाईं, लेकिन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कीमतें उल्टा बढ़ने से सवाल खड़े हो गए हैं। जांच चल रही है और आने वाले समय में कंपनियों से जवाबदेही तय होगी। वहीं, RBI के नए फैसलों से रुपए को वैश्विक स्तर पर मज़बूती मिलेगी और भारत का व्यापारिक संतुलन बेहतर हो सकता है। अब देखना होगा कि उपभोक्ताओं तक GST राहत कब और कैसे पूरी तरह पहुंचेगी।