America में Shut Down: ट्रंप की नीतियों से फिर ठप हुआ कामकाज, लाखों कर्मचारी संकट में

अमेरिका को पूरी दुनिया अक्सर “सबसे शक्तिशाली देश” मानती है, लेकिन जब वहां की सरकार खुद बंद हो जाती है, तो सवाल उठता है कि आखिर यह कैसे संभव है। इसे कहते हैं Government Shutdown। हाल ही में ट्रंप की सरकार बजट पास नहीं करवा पाई, जिसके बाद वहां शटडाउन लागू हो गया। इसका सीधा असर सरकारी कामकाज, कर्मचारियों की तनख्वाह और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह शटडाउन क्या है, क्यों होता है और अमेरिका पर इसका असर कितना बड़ा है।

Shutdown क्या होता है?

अमेरिका की सरकार को एक बड़ी कंपनी की तरह समझिए। इस कंपनी में लाखों कर्मचारी हैं और खर्च के लिए अरबों डॉलर का बजट चाहिए। जब अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस बजट पर सहमति नहीं बना पाती, तो सरकार के पास आगे का खर्च करने की अनुमति नहीं होती। नतीजा यह होता है कि कई विभाग बंद कर दिए जाते हैं और लाखों कर्मचारियों को या तो बिना वेतन घर भेज दिया जाता है या बिना पगार काम करना पड़ता है। यही स्थिति कहलाती है गवर्नमेंट शटडाउन

क्यों हुआ शटडाउन?

इस बार का विवाद Healthcare Subsidy को लेकर है। Democratic चाहते थे कि Obama केयर और अन्य हेल्थ प्रोग्राम्स की सब्सिडी बढ़ाई जाए, जबकि Republican पार्टी मानती है कि इससे सरकारी खर्च और बढ़ जाएगा। दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं हो पाया और तय समय तक बजट पास नहीं हुआ। नतीजा यह हुआ कि सरकार ठप हो गई और Trump प्रशासन ने चेतावनी दी कि वे बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी भी कर सकते हैं।

इतिहास की झलक

अमेरिका में शटडाउन कोई नई बात नहीं है।

  • पहला शटडाउन 1981 में राष्ट्रपति Ronald Reagan के समय हुआ था।
  • 1995-96 में बिल क्लिंटन के दौर में 21 दिन तक सरकार बंद रही थी।
  • Barack Obama के शासनकाल में भी 2013 में 16 दिन का शटडाउन हुआ था।
  • लेकिन सबसे लंबा शटडाउन 2018-19 में Donald Trump के कार्यकाल में हुआ, जब 35 दिनों तक सरकारी कामकाज बंद रहा।

हर बार इसका असर सरकारी कर्मचारियों, पर्यटकों और आम जनता पर पड़ा है।

असर आम लोगों पर

शटडाउन का सबसे बड़ा असर सरकारी कर्मचारियों पर पड़ता है। लाखों लोग बिना वेतन घर भेज दिए जाते हैं। संग्रहालय, नेशनल पार्क और म्यूजियम तुरंत बंद कर दिए जाते हैं। एयर ट्रैवल भी प्रभावित होता है क्योंकि एयरपोर्ट्स पर स्टाफ की कमी हो जाती है। इस बार भी आशंका है कि लगभग 8 लाख से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित होंगे।

आर्थिक नुकसान

शटडाउन जितना लंबा चलता है, उतना ही इसका नुकसान बढ़ता है। 2018-19 के शटडाउन में अमेरिका को लगभग 11 अरब डॉलर का घाटा हुआ था। इस बार भी अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजार दोनों पर पड़ेगा।

आगे का रास्ता

शटडाउन खत्म करने का केवल एक ही तरीका है—कांग्रेस को बजट पास करना होगा। इसके लिए Republican और Democratic को समझौता करना पड़ेगा। लेकिन फिलहाल दोनों ही अपने-अपने राजनीतिक फायदे देख रहे हैं। अगर समाधान जल्दी नहीं निकला तो इसका असर न सिर्फ अमेरिकी जनता बल्कि पूरी दुनिया पर महसूस किया जाएगा।

निष्कर्ष

अमेरिका में शटडाउन यह दिखाता है कि दुनिया की सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक व्यवस्था भी राजनीतिक खींचतान की वजह से ठप हो सकती है। लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। अब सवाल यही है कि ट्रंप और विपक्ष कितनी जल्दी सहमति बनाते हैं और क्या अमेरिका अपने ही बनाए इस संकट से जल्द निकल पाएगा।

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